गैलरी

'पितृ पर्वत' की मूल परिकल्पना सिर्फ एक बंजर पहाड़ी को हराभरा बनाकर पितरों की स्मृति को स्थायी बनाए रखने की थी लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया इस संकल्प ने नई-नई योजनाओं के लिए मार्ग प्रशस्त करना आरंभ कर दिया। यहीं एक कार्यक्रम में जब पर्वत पर हनुमानजी की प्रतिमा लगाने का सुझाव आया तो दूसरे ही पल इस कल्पना को साकार करने वाले मुख्य सूत्रधार श्री कैलाश विजयवर्गीय ने मंच से ही मूर्तिकार से मूर्ति निर्माण के लिए चर्चा कर ली। यह पूछे जाने पर कि मूर्ति कितनी बड़ी होगी, श्री विजयवर्गीय ने कहा -जितनी विशाल आप बना सकें। इसी के साथ अष्ट धातु की 71 फ़ीट ऊंची 54 फ़ीट चौड़ी और 108 टन वजन की विशालकाय प्रतिमा का निर्माण शुरू हो गया था। इस प्रतिमा की खासियत यह है कि यह सात चक्रों वाली है जो भक्तों के कल्याण के साथ इंदौर शहर के वास्तु को भी ठीक करेगी। भजन करते हुए बैठे हनुमानजी की यह देश की सबसे बड़ी प्रतिमा है। इनके साथ यहां प्राचीन शिव मन्दिर, बाल हनुमान मंदिर, भेरूबाबा मंदिर, पितरेश्वर हनुमान मंदिर और माता अंजना मंदिर भी शामिल हैं जिनके स्थापित होने से यह स्थल 'पितरेश्वर हनुमान धाम' के नाम से जाना जा रहा है।